
त्रिशा सड़क के किनारे से चल रही थी।बगल से बहुत सी गाड़ियों का आवा जाई लगा हुआ था।त्रिशा किसी गहरे सोच में डूबी हुई सड़क के किनारे से चले जा रही थी।
" अब न मेरे पास नौकरी है।और नाही अब पैसे बचे है की मैं अपना खर्च उठा पाऊं और ऐसे में घर से पैसे भी नही मांग सकती। क्या करू कुछ नही समझ आ रहा हैं। इतने सालों के भाग दौड़ के बाद मुझे ये एक फ़िल्म मिला भी है जिसे मैं करना तो चाहती हूं। पर न जाने क्यों मेरा दिल नही मान रहा है।"त्रिशा के दिमाग में बस यही सारी बातें घूम रही थी।



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