
ये कहानी है अर्जुन रॉय जो की मुंबई के सबसे बड़े प्रोड्यूसर,और साथ ही एक राइटर भी था। यु तो अर्जुन एक बहुत ही अच्छे स्वभाव का आदमी था।पर साथ ही उसमे एक बहुत बुरी आदत भी थीं।ओ हर रोज नई नई लडकियों के साथ राते गुजारना बेहद पसन्द करता था।
अर्जुन रॉय की न्यू फिल्म """आवारगी """ के लिए ऑडिशन चल रहा थी।जहा उस फ़िल्म के ऑडिशन लिए बहुत सी लड़किया लाइन में लगी हुई थी। वहा बहुत ही ज्यादा भीड़ था।, उस लाइन में एक बहुत ही सिंपल सी दिखने वाली लड़की कुर्ती पजामा पहनी साइन पर आसमानी रंग का दुपट्टा लिए खड़ी थी।
ओ भी ऑडिशन के लिए ही आई हुई थी। नाम त्रिशा, रंग गोरा लंबे काले घने बाल। आंखों में सितारों सी चमक हाथ में घड़ी और बाजु में एक हैंगिंग बैग टंगा हुआ।दिखने में बहुत ही सिंपल पर उसकी खूबसूरती वाकही कमाल की थी।पर वहा और भी बहुत सी लड़किया थी जो काफी हॉट ड्रेस पहन कर आई हुई थीं ताकि ये रोल उन्हे ही मिल।
उसी बीच वहा उस फिल्म के प्रोड्यूसर अर्जुन रॉय ब्लैक कार में आता है।उसे देखते ही वहा खड़ी भीड़ से आवाजे गूंजने लगती है।"सर एक ऑटोग्राफ,, प्लीज सर एक ऑटोग्राफ,,,सर एक फोट प्लीज सर"इसी तरह की आवाजे गज रही थी।अर्जुन कार से उतरने के तुरंत बाद किसी तरह से अंदर पहुंचता है।
बहुत सी लड़किया वहा ऑडिशन देने के साथ साथ अपने बॉडी से आधा कपड़ा नीचे के तरफ सरका कर सामने खड़े कास्टिंग डॉयरेक्टर,और बाकी के मेंबर्स का ध्यान अपने तरफ आकर्षित करने की कोशिश कर रही थी । ताकि इस फिल्म में उन्हें आसानी से रोल मिल जाए। और कही न कही फिल्म इंडस्ट्री में कुछ ऐसे लोग भी है जो ऐसे ही लड़कियों की तलास में रहते है। जो उन्हे कुश कर सके और उनके प्यास शांत कर सके।
बहुत सी लड़किया ऑडिशन देने आई और देखते ही देखते ऑडिशन ओवर कर दिया गया था। क्योंकि अब उनके फिल्म के लिए जैसी लड़की की तलाश थी अब उन्हें मिल चुकी थी।
"अभी तो बहुत सी लड़कियां बाहर ही खड़ी है ,तो फिर इतनी जल्दी हीरोइन कैसे मिल गई?" भीड़ में खड़ी एक लड़की ने ऊंची आवाज में सामने खड़े असिस्टेंट कास्टिंग डॉयरेक्टर से सवाल की।
"देखिए यहां सबको काम मिलेगा हमने नही कहा यह हमारे नीड और जरूरत के अनुसार डिसाइड किया जाता है।जो हमे मिल चुकी है। अब आप जा सकते है।"असिस्टेंट ये कह कर अंदर के तरफ चला जाता है।
सब सोचने लगे और निराश हो कर वापस जाने लगे। त्रिशा का भी ऑडिशन हो चुका था। उसका जी अंदर से बहुत घबरा रहा था।की वहा इतनी खूबसूरत लड़कियां आई हुई थी। और मैं कितनी सिंपल शायद उन्ही में से किसी को सिलेक्ट किया गया होगा। और भी बहुत से गंदे विचार थे ,जो त्रिशा के मन में आ रहा था।आखिर आए भी तो क्यों न ?फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे काम हर रोज सामने आते ही रहते है ।जिनमे लड़किया खुदको हीरोइन बनने के लिए अपने आपको किसी प्रोड्यूसर या किसी डॉयरेक्टर के बिस्तर पर लेटा लेती है।
त्रिशा ये सोचते हुए अपने चौल में पहुंचती है।,जहा दुसरे जगहों से स्ट्रगलर आ कर रहते थे। ,त्रिशा के साथ दो और लड़कियां भी रहती थी।
त्रिशा के पास इतने पैसे नही थे की ओ अकेले रूम का किराया दे सके इसीलिए दो और लडकियों के साथ मिल कर रहती थी।एक ही कमरे में तीन बेड लगे हुए थे।
त्रिशा एक तरफ आइने के सामने अपने फेशियल एक्सप्रेशन को देख रही थी की कही उसने ऑडिशन देते टाइम कुछ गलती तो नही कर दी?
"अरे फ्यूचर की माधुरी दीक्षित बस भी करो इतने साल हो गए पर अब तक तुम्हें कोई फिल्म में हीरोइन का रोल तो छोड़ो कोई साइड रोल भी नही मिला।"त्रिशा की रूममेट शालिनी कहती है।
शालिनी के ये बोलते ही वही पास में बैठ उसकी दूसरी रूमेट मधु भी ठहाके मारके हसने लगती है।
"अरे यार जो तू सोच रही है ना की तू अपने टैलेंट और अपने स्ट्रगल के जरिए हीरोइन बन जाएगी तो ये तेरा बहम है। यहां नाम बनाने के लिए किसी के बिस्तर को गर्म करना पड़ता है।,तब जा के सायद कोई काम मिलता है और तू तो ये सब करने से रही।"मधु बोलती है।
मधु की बात सुन कर त्रिशा अंदर से एक दम टूट गई और कुछ न बोलते हुए वहा से बाहर निकल कर चली गईं।
वही दूसरी तरफ अर्जुन रॉय अपने ऑफिस में बैठ कर कॉफी पीते हुए सामने कंप्यूटर में ऑडीशन के विडियोज देख था था।उसी बीच विवेक पटेल (कास्टिंग डायरेक्टर )आता है।
"क्या यार अर्जुन मुझे एक बात समझ नही आई तूने ऑडिशन रोक क्यों दिया ?"... विवेक पूछता है।
"वो इस लिए क्योंकि मुझे मेरी फिल्म की हीरोइन मिल चुकी है।".....अर्जुन अपने जगह से उठते हुए मुस्कुरा कर जवाब देता है।
अर्जुन की बात सुनते ही विवेक एक दम से हक्का बक्का रह गया।
"क्या, तुम्हें हीरोइन मिल चुकी है।फिर ये ऑडिशन किस लिए करवाया ?"....अर्जुन के तरफ हैरनी से देखते हुए उससे फिर से पुछता है।
" अरे मुझे हीरोइन पहले से नही मिली।" अर्जुन बोलता है।
"तो फिर?" विवेक पूछता है।
"पहले तुम बैठो"अर्जुन विवेक को पास के चेयर के तरफ इशारा करते हुए बैठने को कहता है।
"ये रही वो लड़की! यही है,जिसे मैं अपने फिल्म में लांच करने वाला हु।".. अर्जुन कंप्यूटर में ऑडिशन वाला वीडियो दिखाते हुए विवेक से बोला"
"पर मुझे नही लगता की ये लड़की इस फ़िल्म के लिए सही फिट होगी।और हमें इस फिल्म को हिट करने के लिए कोई फैमस एक्ट्रेस चाहिए ना की न्यू कॉमर्स लड़की को लांच करना चाहिए, इससे हमारे फिल्म पर एफेक्ट पड़ेगा।" विवेक अपनी राय देते हुए बोला।
"अरे विवेक तुम मेरे साथ इतने सालों से काम कर रहे हो पर शायद अब तक तुम मुझे अच्छे से समझ नही पाए? क्यों? और वैसे भी फिल्म की हिट होने या न होने की चिंता तुम मत करो ज्यादा से ज्यादा मेरे 50 करोड़ का नुकसान होगा। मैं वापस से उतने पैसे कमा लूंगा पर ये लड़की मुझे हर हालत में चाहिए मेरे फिल्म के लिए।क्या समझें?"....अर्जुन के चेहरे पर गंभीरता झलक रही थी,और अगले ही पल स्माइल आ गई।
"ठीक है जैसा तुम सही समझो अब जब की तुमने डिसाइड कर ही लिया है तो इस लड़की को कॉल करके कॉन्ट्रैक्ट साइन करने के लिए बात कर लेता हु। " विवेक बोला
"हा ,, हां,जरूर शुभ काम में देरी नही करते!"अर्जून हस्ते हुए बोला।
इतना बोल कर अर्जुन वहा से बाहर निकल गया।विवेक ऑडीशन वीडियो प्ले कर के वहा से त्रिशा की डिटेल्स नोट करने
लगा।
आखिर क्या वजह थी जो अर्जुन ने त्रिशा को अपने फिल्म में हीरोइन चुना?क्या वाकाही त्रिशा की टैलेंट की वजह से उसे इस फिल्म में हीरोइन का रोल मिला?या फिर इसके पीछे अर्जुन की कोई साजिश थी?कहानी को समझने के लिए पढ़ते रहिए DONT TOUCH MY SOUL
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नोट: यह एक काल्पनिक कहानी है। इस कहानी का वास्तविकता से कोई संबंध नही है।और इस कहानी में दर्शाए गए हर कैरेक्टर के रोल और उनके हरकत सिर्फ आपके मनोरंजन के लिए होगा ना की आपके विचारो और भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए।



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